भगवान की प्राप्ति का मार्ग
सबसे बड़े अचरज की बात तो ये है कि जब अहंकार हावी होता है तो सबसे पहले बुद्धि और विवेक का ही नाश होता है। ज्ञान की ज्योती से ही अज्ञानता का अन्धकार मिट सकता है। पर ये ज्ञान की ज्योती भी परमात्मा की इच्छा से ही प्रज्वल्लीत होती है अन्यथा मानव परमात्मा के करीब रेह कर भी उसे पहचानने की योग्यता नही रख पाता ।
कभी कभी ज्ञान हमारे चारों ओर होने के बाद भी हम उसे ग्रहण नही कर पाते क्यूँ?
क्युकि हमारी समझ के चारों ओर विकारों और अज्ञानता का आवरण फैला होता है।
भगवत भाव में डुब कर ही परमात्मा की अनुभूति सम्भव है । वो आपके समक्ष होंगे जब आप उनमें खुद को खो देंगे।
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