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मेरे सतगुरु मेरे भाव 🙏🙏

श्री गुरु चरणों में कोटि कोटि वन्दन। हे मेरे सतगुरु आपने मेरे जीवन को अपने नाम से रोशन किया है, मेरे जीवन को आधार दिया है । आज मैने अपना भाव आपके चरणों मे समर्पित किया। मेरे मालिक मेरे विचारों की भटकन को सही दिशा प्रदान करे । मुझे अपने चरणों में स्थान दे। मेरा चित आप में रमे मन से आपका चिंतन मनन हो मेरी इन्द्रियां सभी विकारो   को छोड़ बस आपके ध्यान में ही रहे। श्वास श्वास से नाम सिमरुं ऐसा दे वरदान , ए मालिक तेरा ध्यान धरु करू तेरा गुणगान।  Satnam sakshi मेरे सतगुरु जी🙏🙏 😊😊 Tulsivai

राम मंदिर अयोध्या जी

मेरे रघुनन्दन श्रीरामजी का भव्य श्री रामलल्ला धाम अयोध्या का मुख्य आकर्षण होने वाला है । जहाँ मेरे राघव माँ सीता और चारों भईया सहित स्वर्ण सिंघासन पर विराजमान होंगे। अपने आप में भव्यता और सुन्दरता का केन्द्र होने वाला ये मंदिर हम भारतीयों के मान की परिभाषा होगा।  प्रेम और करुणामयी मरियादा पुरुषोतम श्रीरामजी का आशीर्वाद हम भक्तों पर सदैव बना रहे।  जय श्री सियाराम जी।🙏🙏❣

मेरा अनुभव

जब हम अपने आपको पुर्णतया परमेश्वर को समर्पित कर देते है तो हमारे जीवन के प्रत्येक क्षण का दायित्व प्रभू स्वयं उठाते है।  मैं उसकी सत्ता में निर्भय हो कर जीती हूँ क्युकि मेरे प्रभू हर क्षण मेरे साथ रहते है, मेरी रक्षा करते है ।        
भगवान की प्राप्ति का मार्ग सबसे बड़े अचरज की बात तो ये है कि जब अहंकार हावी होता है तो सबसे पहले बुद्धि और विवेक का ही नाश होता है। ज्ञान की ज्योती से ही अज्ञानता का अन्धकार मिट सकता है। पर ये ज्ञान की ज्योती भी परमात्मा की इच्छा से ही प्रज्वल्लीत होती है अन्यथा मानव परमात्मा के करीब रेह कर भी उसे पहचानने की योग्यता नही रख पाता ।  कभी कभी ज्ञान हमारे चारों ओर होने के बाद भी हम उसे ग्रहण नही कर पाते क्यूँ?  क्युकि हमारी समझ के चारों ओर विकारों और अज्ञानता का आवरण फैला होता है।  भगवत भाव में डुब कर ही परमात्मा की अनुभूति सम्भव है । वो आपके  समक्ष होंगे जब आप उनमें खुद को खो देंगे।

अहंकार पतन का द्वार

रावण जानता था की वो सीता के रूप में भगवती माँ महालक्ष्मी का हरण कर रहा है पर उसे तो सिर्फ जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु के हाथो मृत्यू को प्राप्त कर उनके परम धाम को पाना था । प्रख्यांड पण्डित महाज्ञानी चारों वेदों के ज्ञाता का अहंकार भी सिर्फ संसार को ये संदेश देने के लिये था की अपार धन समृधि होने के बाद अगर आप में विवेक की कमी है तो आपका मार्ग पतन की ओर है। सबसे बड़े अचरज की बात तो ये है कि जब अहंकार हावी होता है तो सबसे पहले बुद्धि और विवेक का ही नाश होता है। ज्ञान की ज्योती से ही अज्ञानता का अन्धकार मिट सकता है। पर ये ज्ञान की ज्योती भी परमात्मा की इच्छा से ही प्रज्वल्लीत होती है अन्यथा मानव परमात्मा के करीब रेह कर भी उसे पहचानने की योग्यता नही रख पाता ।